संवाददाता नांदेड नांदेड एजुकेशन सोसायटी द्वारा संचालित, पीपल्स कॉलेज के हिंदी विभाग एवं अनुसंधान केंद्र द्वारा आयोजित प्रसिद्ध शृंखला '...
संवाददाता नांदेड
नांदेड एजुकेशन सोसायटी द्वारा संचालित, पीपल्स कॉलेज के हिंदी विभाग एवं अनुसंधान केंद्र द्वारा आयोजित प्रसिद्ध शृंखला 'संवाद लेखक से...' की सातवीं कड़ी का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डॉ.जे.देवीदास ने छात्रों को संबोधित करते हुए साहित्यिक लेखन की बारीकियों से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि, जब मन में निरंतर बेचैनी बनी रहती है, तब संवेदनाएं लेखनी के माध्यम से बाहर आती हैं। छात्रों को संवेदनशीलता बनाए रखने का संदेश देते स्त्री को केवल रीतिकाल के सौंदर्य बोध या पारिवारिक रिश्तों के संकीर्ण चश्मे से न देखकर उसके स्वतंत्र मानसिक, बौद्धिक और आध्यात्मिक अस्तित्व के रूप में स्वीकार किया जाना चाहिए। इस कार्यक्रम के अध्यक्ष पद से बोलते हुए प्राचार्य डॉ.विकास सुकाले ने आयोजन की सफलता की सराहना की और छात्रों को ऐसे कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की प्रेरणा दी। प्रमुख उपस्थिति के रूप में डॉ.पतंगे ने अपनी मातृभाषा में संबोधित करते हुए कहा कि, नए लेखकों के पास सूक्ष्म निरीक्षण दृष्टि, संवेदनशीलता और धरोहर होनी चाहिए। उन्होंने मराठी कवियों की रचनाओं का उल्लेख कर स्पष्ट किया कि साहित्य मुख्य रूप से मानवीय वेदना की ही उपज है। इस कार्यक्रम की शुरुआत विभाग प्रमुख एवं संयोजक प्रो.डॉ.भगवान जाधव के प्रस्तावना और अतिथि परिचय के साथ हुई। कार्यक्रम का मंच संचालन डॉ.वर्षा मोरे ने किया तथा आभार प्रदर्शन डॉ.अर्चना ठोके द्वारा संपन्न हुआ। इस अवसर पर हिंदी विभाग के डॉ.मुकुंद कवडे, डॉ.भिमराव घोडगे, डॉ.सय्यद वाजिद, डॉ.प्रीती यादव, डॉ.विजया उफाड़े, डॉ.स्मिता चालिकवार सहित अन्य विभागों से शिवराम जाधव, डॉ.अंभोरे, डॉ.अनिल चिलपिंपरे एवं डॉ. व्यंकटेश जाधव उपस्थित रहे। कार्यक्रम में स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर के छात्र-छात्राओं की भारी उपस्थिति रही।

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