श्री राहुल गांधी ने विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि केसी वेणुगोपाल जी, अशोक गहलोत जी, डॉ रघु शर्मा जी, जगदीश भाई ठाकोर जी, शक्ति सिंह गोहिल जी, सिद्धार्थ पटेल जी, रमेश चेन्निथला जी, मोहन प्रकाश जी, मिलिंद देवरा जी, स्टेज पर कांग्रेस पार्टी के सब वरिष्ठ नेता, हमारे प्यारे कार्यकर्ता, भाईयों और बहनों, गुजरात के युवाओं, किसानों, प्रेस के हमारे मित्रों, आप सबका यहाँ बहुत-बहुत स्वागत है, नमस्कार।
प्रेस के मित्रों तो कहतो हो, मगर आप हमारी बात नहीं उठाते हो टीवी पर। देखो मुस्कुरा रहे हैं (पत्रकारों को मुस्कुराते हुए देखकर कहा), पीछे से रिमोट कंट्रोल है। इनकी गलती नहीं है वैसे, ये कोशिश करते हैं, मगर इनके जो मालिक हैं इनको, देखो ऐसे कर रहे हैं, (इशारे से समझाते हुए कहा)।
70 दिन पहले कन्याकुमारी से हमने भारत जोड़ो यात्रा शुरु की थी और अब हम महाराष्ट्र से मध्य प्रदेश में घुस रहे हैं। यात्रा श्रीनगर तक जाएगी और श्रीनगर में हमारा जो तिरंगा झंडा है, उसे वो यात्रा लहराएगी। तकरीबन 3,500 किलोमीटर की यात्रा है। 120 दिन, 125 दिन लगने चाहिए। पैदल यात्रा है। बहुत सीखने को मिल रहा है। युवाओं से बातचीत हो रही है, किसानों से, मजदूरों से, छोटे व्यापारियों से, जो स्मॉल और मीडियम बिजनेस चलाते हैं, उनसे बात हो रही है। बहुत प्यार दे रहे हैं, बहुत स्नेह दे रहे हैं। सब जगह, लाखों लोग आ रहे हैं। ये टीवी वाले इतना दिखाते नहीं हैं, मगर नदी सी है। रोज 5:30 बजे लोग आते है, 6 बजे हम शुरु करते हैं। 7:30 बजे रात को यात्रा खत्म होती है। अजीब सी बात है, थकान बिल्कुल नहीं होती, बिल्कुल नहीं, क्योंकि पूरी की पूरी शक्ति, जनता की शक्ति हमारी मदद कर रही है। दुख इस बात का है कि ये यात्रा गुजरात से नहीं निकली।
बड़ी खुशी हो रही है, मगर दुख भी लग रहा है। युवाओं से बात करते हैं। हजारों युवाओं से मैंने बात की, हर 5 या 10 मिनट में कोई युवा आता है, अपने सपने के बारे में मुझे बताता है। कोई कहता है, इंजीनियर बनना था। सालों पढ़ाई की, सपना देखा था कम्प्यूटर इंजीनियर बनेंगे, आज मजदूरी करने को मजबूर हैं। कोई कहता है, शिक्षा के पैसे दिए, किसी प्राईवेट इंस्टीट्यूशन को लाखों रुपए दिए, आज ऊबर की गाड़ी चलानी पड़ रही है, पिज्जा डिलीवर करना पड़ रहा है।
किसानों से बात करो, सवाल पूछते हैं, राहुल जी, हमें बात समझ नहीं आती, हिंदुस्तान के 3-4 अरबपति लाखों-करोड़ रुपए कर्जा लेते हैं और फिर हिंदुस्तान के सबसे अमीर लोगों का कर्जा माफ हो जाता है। हमने क्या गलती की? हम 50 हजार रुपए का कर्जा लेते हैं, एक लाख रुपए का कर्जा लेते हैं, हमारा कर्जा कभी माफ क्यों नहीं होता? जब वो कर्जा वापस नहीं देते, तो उसे सरकार नॉन परफॉर्मिंग एसेट कहती है, उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती, मगर जब किसान 50 हजार रुपए कर्जा लेता है, वापस नहीं दे पाता, वो नॉन परफॉर्मिंग एसेट नहीं कहलाया जाता, वो डिफॉल्टर कहलाया जाता है। ये सवाल किसान पूछ रहे हैं।
प्रधानमंत्री बीमा योजना में पैसा डालते हैं, तूफान आता है, बारिश होती है, खेत बर्बाद हो जाता है, एक रूपया नहीं मिलता। फोन लगाते रहते हैं, नंबर से कोई जवाब नहीं देता। मेल भेजते रहते हैं, इंटरनेट पर मेल भेजते रहते हैं, कोई जवाब नहीं मिलता। ये सब सुनकर काफी दुख होता है।
यहाँ पर मोरबी की ट्रेजडी हुई, उस समय पत्रकारों ने पूछा मुझसे, इसके बारे में क्या सोचते हो? मैंने बोला देखिए, 150 लोगों की मृत्यु हुई, ये राजनैतिक मुद्दा नहीं है। इस पर मैं बोलूँगा नहीं, मगर सवाल आज उठता है, जिन्होंने ये काम किया, उनके खिलाफ कोई भी कार्रवाई नहीं हुई। कोई एफआईआर नहीं। बीजेपी के साथ उनका अच्छा रिश्ता है। तो उनका कुछ नहीं होगा, क्या? चौकीदारों को पकड़ लिया, अंदर कर दिया। मगर जो जिम्मेदार लोग हैं, उनके खिलाफ कुछ नहीं।
ये गुजरात, जो आपका प्रदेश है, स्मॉल और मीडियम इंडस्ट्री का ये सेंटर है, ये आपकी रीढ़ की हड्डी है। ये जो छोटी कंपनियाँ हैं, मिडिल साइज कंपनियाँ हैं, और आपके लोग सिर्फ गुजरात में ही नहीं चलाते, पूरे हिंदुस्तान में आप इनको चलाते हो, यही तो देश को रोजगार देती हैं। ये जो अरबपति हैं, 2-3, ये रोजगार नहीं देते हैं। ये जो छोटे बिजनेसेज हैं, मिडिल साइज बिजनेसेज हैं, वो रोजगार देते थे। क्या हुआ? सरकार ने नोटबंदी की, आपसे कहा था कालाधन मिटा देंगे। कालाधन नहीं मिटा, मगर सारे के सारे स्मॉल एंड मीडियम बिजनेसेज बंद हो गए। फिर गलत जीएसटी लागू किया। 5 अलग-अलग टैक्स। हर महीने फॉर्म भरो, जो बचे थे, वो भी खत्म हो गए। रास्ता साफ करना था। अरबपतियों के लिए रास्ता साफ करना था। कोरोना के समय भी वही किया।
मुझे याद है, हिंदुस्तान के मजदूर, किसी पत्रकार ने मुझे पूछा कि आप 2,000 किलोमीटर चले हो, मैंने उससे कहा देखिए, ये कोई बड़ी बात नहीं है, हिंदुस्तान का हर मजदूर ये 2,000 किलोमीटर चला था, भूखा चला था, तो ये कोई बड़ी बात नहीं है। मगर जब उस मजदूर को सरकार की जरुरत थी, हिंदुस्तान की सरकार ने, गुजरात की सरकार ने उनकी मदद नहीं की। जब वो मजदूर सड़क पर गिर रहे थे, मर रहे थे, उसी समय बीजेपी की सरकार ने हिंदुस्तान के सबसे अमीर अरबपतियों का लाखों करोड़ रुपया कर्जा माफ किया। जो स्मॉल औऱ मीडियम बिजनेस चलाते थे, वो चिल्ला रहे थे, हम बर्बाद हो गए। नोटबंदी हुई, गलत जीएसटी लागू हुई उसके बाद कोविड आया, मदद नहीं की, सपोर्ट नहीं दी।
ये पॉलिसियाँ नहीं हैं, ये नोटबंदी, ये जीएसटी, कोविड में जो इन्होंने किया, ये पॉलिसी नहीं है, ये किसानों के खिलाफ, मजदूरों के खिलाफ, छोटे व्यापारियों के खिलाफ, स्मॉल और मीडियम बिजनेस चलाने वालों के खिलाफ हथियार हैं, इनको खत्म करने के हथियार हैं। जो हिंदुस्तान के 2-3 बड़े अरबपति हैं, जिनको आप जानते हो, उनके लिए रास्ता साफ करने के हथियार हैं। वो कोई भी बिजनेस चलाना चाहें चला सकते हैं, जो भी करना चाहते हैं। टेलिकॉम बिजनेस करना है, तो टेलिकॉम में घुस जाएंगे। एयरपोर्ट में घुस जाएंगे, पोर्ट्स में घुस जाएंगे, इंफ्रास्ट्रक्चर, खेती, जो भी ये करना चाहते हैं, ग्रोसरी स्टोर्स चेन, जो भी करना चाहते हैं, कर सकते है। जो भी सपना देखना चाहते हैं, देख सकते हैं। मगर, अगर हिंदुस्तान का युवा सपना देखना चाहता है, इंजीनियर बनना चाहता है, तो पहले आप प्राईवेट इंस्टीट्यूशन में जाइए, लाखों रुपए दीजिए, महंगाई सहिए और उसके बाद भी इंजीनियर मत बनिए, मजदूरी कीजिए
आज इस देश में युवाओं को रोजगार नहीं मिल सकता है। 45 साल में सबसे ज्यादा बेरोजगारी आज है गुजरात में, बाकी हिंदुस्तान में। पहले जो गरीब लोग हुआ करते थे, पब्लिक सेक्टर में उनको नौकरी मिल जाती थी। आज पूरा का पूरा पब्लिक सेक्टर प्राईवेटाइज हो रहा है, रेलवेज को प्राईवेटाइज कर रहे हैं, बीएचईएल को प्राईवेटाइज किया जा रहा है, ऑयल कंपनीज को प्राईवेटाइज किया जा रहा है और किसको दिया जा रहा है- उन्हीं 2-3 उद्योगपतियों को। ये आपकी पूंजी है, ये आपका धन है। पब्लिक सेक्टर में आपको रोजगार नहीं मिल सकता। सरकार में लाखों पद खाली पड़े हैं। तो इस प्रकार आप एक तरफ बेरोजगारी को सहते हो, तो दूसरी तरफ बढ़ती महंगाई।
यूपीए के समय पेट्रोल 60 रुपए प्रति लीटर का होता था, आज सौ रुपए से ज्यादा का है। गैस सिलेंडर 400 रुपए का था, आज कितने का है- 1,100 रुपए का है। दो हिंदुस्तान बन रहे हैं, एक अरबपतियों का। वो जो भी सपना देखना चाहते हैं, देख सकते हैं और दूसरा, हिंदुस्तान की गरीब जनता का, किसानों का, मजदूरों का, छोटे व्यापारियों का। हमें दो हिंदुस्तान नहीं चाहिए, हमें एक हिंदुस्तान चाहिए, न्याय का हिंदुस्तान चाहिए।
जो भारत जोड़ो यात्रा हमने शुरु की गई है, उसके पीछे सोच आपकी है, गुजरात की है, महात्मा गांधी जी की है। ये नई चीज नहीं कर रहे हैं, हम। रास्ता हमें गुजरात ने दिखाया था। महात्मा गांधी जी ने दिखाया था, सरदार पटेल जी ने दिखाया था। आपसे ही सीखकर हम ये तपस्या कर रहे है, जनता की आवाज सुन रहे हैं। 7-8 घंटे हम चलते हैं, हम कुछ बोलते नहीं हैं, किसानों की बात सुनते हैं, युवाओं की बात सुनते है, मजदूरों की बात सुनते हैं, गले लगते है उनके, और 7-8 घंटे चलने के बाद, कभी 10-11 घंटे भी हो जाते हैं, हम 15 मिनट अपनी बात रखते हैं।
शाम का समय है, आप दूर-दूर से आए हैं, मैं दिल से आपका धन्यवाद करता हूँ। आपने इतना प्यार दिया, इतने प्यार से आपने मेरी बात सुनी, इसके लिए आप सबको बहुत-बहुत धन्यवाद।
नमस्कार। जय हिंद।

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